अम्बिकापुर। सरगुजा जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने एक फैसला सुनाते हुए जिला खनिज संस्थान न्यास अर्थात डीएमएफ मद की 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये की शासकीय राशि में गंभीर वित्तीय अनियमितता और बंदरबांट करने के मामले में थाना प्रभारी, सिटी कोतवाली अम्बिकापुर को एफआईआर दर्ज करने का कड़ा निर्देश दिया है। न्यायालय ने ललिता कुमारी विरुद्ध उत्तर प्रदेश राज्य के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कोतवाली पुलिस को निर्देशित किया है कि वे 9 आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू करें और तय समय सीमा में कोर्ट में चार्जशीट पेश करें।
इन 9 आरोपियों पर दर्ज होगी FIR
अदालत ने आरटीआई एक्टिविस्ट एवं प्रार्थी अभयनारायण पाण्डेय द्वारा धारा 175(3) BNSS (पूर्ववर्ती 156(3) CrPC) के तहत दायर आवेदन को स्वीकार करते हुए 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश कोतवाली थाना को दिया है। श्री सुरेश्वर नाथ तिवारी, सेवानिवृत्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत अम्बिकापुर, श्री विवेक प्रताप सिंह राठौर, उपअभियंता, जनपद पंचायत अम्बिकापुर, श्री उपेन्द्र सिंह सेंगर, तत्कालीन प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी एवं वर्तमान उपअभियंता, श्री शैलेन्द्र मिश्र, तत्कालीन लिपिक, जनपद पंचायत अम्बिकापुर, श्री राम प्रकाश यादव, तत्कालीन सचिव, ग्राम पंचायत केशवपुर, श्री इम्तान सिंह ,तत्कालीन सरपंच, ग्राम पंचायत केशवपुर, श्री सुयस अग्रवाल, व्यवसायी, रायपुर, अरविंद कुमार अग्रवाल, मेसर्स अनन्या कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स, अम्बिकापुर, मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन, कॉन्ट्रैक्टर एंड सप्लायर्स, अम्बिकापुर इन सभी आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 34, 120बी आपराधिक साजिश, 201 सबूत मिटाना, 409 शासकीय राशि का गबन, 420 धोखाधड़ी, 467, 468 और 471 फर्जी दस्तावेज तैयार करना और उनका उपयोग करना के तहत मामला दर्ज करने का आदेश है।
वहीं कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कलेक्टर द्वारा गठित 4 सदस्यीय जांच दल के अधिकारियों डिप्टी कलेक्टर राम सिंह ठाकुर, पीडब्लूडी विभाग ईई वीरेंद्र कुमार सिंह, जिला पंचायत एडीपीओ नेहा सिंह और सहायक कोषालय अधिकारी मनोज कुमार शर्मा के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है क्योंकि वे केवल जांच टीम के सदस्य थे।
क्या है पूरा मामला?
आरटीआई एक्टिविस्ट अभय नारायण पांडेय ने बताया कि ग्राम पंचायत केशवपुर में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए डीएमएफ योजना के तहत कलेक्टर कार्यालय से 31 मार्च 2023 को तीन अलग-अलग प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी की गई थीं। इसमें गार्डन सौंदर्यीकरण और शीशी रोड निर्माण ₹33,24,000, प्रथम तल पर प्रयोगशाला, पुस्तकालय नवीनीकरण व आहाता निर्माण ₹49,57,000, भू-तल पर प्राचार्य कक्ष, ऑफिस नवीनीकरण व पार्किंग शेड निर्माण ₹49,52,000 कुल 1,32,33,000 रुपये के इन कार्यों के लिए ग्राम पंचायत केशवपुर को निर्माण एजेंसी बनाया गया था।
अधिकारियों के दबाव में बिना निविदा के हुआ भुगतान, फर्म का नंबर भी सब-इंजीनियर का निकला
प्रार्थी अभयनारायण पाण्डेय, जो पिछले 30-35 वर्षों से भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्षरत हैं, ने सूचना के अधिकार और अन्य माध्यमों से दस्तावेज जुटाए। जांच में सामने आया कि तत्कालीन सीईओ सुरेश्वर नाथ तिवारी और उपअभियंता विवेक प्रताप सिंह राठौर ने अपने पद का दुरुपयोग कर सरपंच-सचिव को जनपद कार्यालय बुलाया। वहां नियमों, भण्डार क्रय नियमों और जेम पोर्टल को दरकिनार कर बिना किसी खुली निविदा के, मौखिक आदेशों पर करोड़ों रुपये का भुगतान मेसर्स अनन्या कंस्ट्रक्शन और स्मृति कंस्ट्रक्शन को आरटीजीएस और चेक के माध्यम से ट्रांसफर करवा दिया।
चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि भुगतान से जुड़े शासकीय दस्तावेजों में स्मृति कंस्ट्रक्शन का जो मोबाइल नंबर दर्ज था, वह असल में उपअभियंता विवेक प्रताप सिंह राठौर का ही था। सरपंच-सचिव ने भी अपने बयानों में स्वीकार किया कि अधिकारियों के दबाव में आकर उन्होंने केवल नाम की निर्माण एजेंसी के रूप में हस्ताक्षर किए, जबकि सारा काम और भुगतान अफसरों के चहेते ठेकेदारों द्वारा संचालित किया जा रहा था। ठेकेदारों ने कार्यों के बदले कोई वैध बिल-वाउचर या देयक भी पंचायत को प्रस्तुत नहीं किए।
कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में खुली पोल, कोर्ट ने खारिज किया लोकसेवक का सुरक्षा कवच
मामले की शिकायत जब जिला प्रशासन को तात्कालीन जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव द्वारा की गई, तब कलेक्टर सरगुजा ने 4 सदस्यीय जांच दल का गठन किया। जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि स्वीकृत प्राकलन और तकनीकी नियमों के अनुसार काम नहीं कराया गया और भारी वित्तीय अनियमितताएं की गईं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपियों को धारा 197 लोकसेवकों को मिलने वाला कानूनी संरक्षण का लाभ देने से साफ़ इनकार कर दिया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उदाहरण देते हुए कहा कि अपने पदीय दायित्वों का दुरुपयोग कर योजनाबद्ध तरीके से की गई आपराधिक साजिश और वित्तीय धोखाधड़ी को शासकीय दायित्व का हिस्सा नहीं माना जा सकता।
पहले भी दर्ज हो चुका है मामला
विगत सुनवाई में यह तथ्य भी सामने आया कि अनावेदक सब-इंजीनियर विवेक प्रताप सिंह राठौर और उपेन्द्र सिंह सेंगर के खिलाफ इसी न्यायालय के आदेश पर 28 मार्च 2025 को थाना कोतवाली में एक अन्य भ्रष्टाचार के मामले में धारा 156(3) के तहत एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। अब डीएमएफ घोटाले के इस नए मामले ने सरगुजा के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। कोर्ट ने थाना कोतवाली को तुरंत मामला दर्ज कर विवेचना की प्रतिलिपि न्यायालय को सौंपने का सख्त निर्देश दिया है।



