संविधान की समानता पर सवाल, आंगनबाड़ी में जाति के नाम पर भेदभाव
आंगनबाड़ी में दलित बच्चों से भेदभाव, कार्यकर्ता पर लगे कई गंभीर आरोप
आदित्य गुप्ता
सरगुजा :- आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़ा एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक समानता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उदयपुर विकासखंड के डांडगांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में दलित (हरिजन समाज) बच्चों के साथ कथित रूप से भेदभाव किए जाने का मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता न केवल बच्चों के साथ जातिगत भेदभाव कर रही है, बल्कि उनके पोषण और गर्भवती महिलाओं के अधिकारों के साथ भी गंभीर अनियमितताएं की जा रही हैं।
आंगनबाड़ी केंद्र में खुलेआम भेदभाव का आरोप
जानकारी के अनुसार, डांडगांव के हरिजन पारा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता द्वारा हरिजन समाज के बच्चों को अन्य बच्चों से अलग बैठाया जाता है। यह आरोप सामने आए हैं कि बच्चों के साथ आज भी जाति के आधार पर व्यवहार किया जा रहा है, जो संविधान और सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दलित बच्चों को मुख्य बच्चों की पंक्ति से अलग बैठाया जाता है, जिससे उनमें हीन भावना पैदा होती है।
बच्चों से धुलवाए जाते हैं जूठे बर्तन
मामले में यह भी गंभीर आरोप लगे हैं कि आंगनबाड़ी केंद्र में भोजन कराने के बाद बच्चों से उनके जूठे बर्तन खुद ही धुलवाए जाते हैं। यह न केवल बच्चों के आत्मसम्मान के खिलाफ है, बल्कि बाल अधिकारों और आंगनबाड़ी संचालन के तय मानकों का भी उल्लंघन माना जा रहा है।
पोषण आहार में गड़बड़ी और हक पर डाका
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि बच्चों को मिलने वाले पूरक पोषण आहार में भी भारी गड़बड़ी की जा रही है। कई बार बच्चों को पूरा भोजन नहीं दिया जाता या गुणवत्ता बेहद खराब होती है। इसके साथ ही यह भी आरोप है कि गर्भवती महिलाओं के लिए निर्धारित गर्म भोजन को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता स्वयं खा जाती है, जिससे महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है।