दुर्ग। पुलगांव स्थित बाल सुधार गृह से रातों–रात हुई बड़ी लापरवाही ने सुरक्षा व्यवस्था की पूरी पोल खोल दी है। 28 नवंबर की रात यहां से 7 आपचारी नाबालिग मौका पाकर फरार हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और 4 बच्चों को पकड़कर सुधार गृह वापस भेज दिया गया, जबकि 3 बच्चे अब भी लापता हैं, जिनकी खोज तेज़ी से जारी है। पुलिस को आशंका है कि ये नाबालिग दुर्ग जिले की सीमा पार कर चुके हैं। यहघटना बाल सुधार गृह की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि एक महीने में यह दूसरी घटना है। इससे पहले 3 नवंबर को भी 3 नाबालिगफरार हुए थे, जिनमें हत्या और लूट जैसे गंभीर अपराधों में शामिल बच्चे भी थे।
सुरक्षा व्यवस्था फिर सवालों में
पुलगांव बाल सुधार गृह महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित है। लगातार हो रही फरारी की घटनाओं के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था में सुधारनहीं होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों और बाल हितैषी संगठनों का कहना है कि—
सुरक्षा गार्डों की सतर्कता पर सवाल
CCTV और निगरानी व्यवस्था कमजोर
नाबालिगों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में प्रबंधन असफल
3 नाबालिगों की तलाश जारी
पुलिस टीमों ने आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया है। कई स्थानों पर दबिश दी जा रही है। अंदेशा है कि फरार नाबालिग जिले से बाहरनिकल चुके हैं, जिसके चलते अन्य जिलों की पुलिस को भी सतर्क कर दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने कहा—“फरार तीनों बच्चों को जल्द पकड़ा जाएगा। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुधार गृह की सुरक्षा की भीसमीक्षा होगी।”
लगातार घटनाएँ, लापरवाही उजागर
पुलगांव सुधार गृह से बच्चों के बार–बार फरार होने की घटनाएँ अब आम हो चुकी हैं। दो बार लगातार सुरक्षा चूक होने से यह साफ है कि प्रबंधन मेंगंभीर खामियाँ हैं। ऐसी घटनाएँ न सिर्फ सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं, बल्कि समाज और स्थानीय क्षेत्रों में भी डर का माहौल पैदा करती हैं, क्योंकि इनमेंगंभीर अपराधों में लिप्त नाबालिग भी शामिल रहते हैं।
