अम्बिकापुर– सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र उदयपुर में लंबे समय से मिल रही अनियमितताओं और अव्यवस्थाओं की शिकायतों ने आखिरकार बड़ा रूपले लिया। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों के बीच सरगुजा संभागीय संयुक्त संचालक डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने 28 नवम्बर की शाम4.50 बजे औचक निरीक्षण करते हुए गंभीर खामियों का खुलासा किया। निरीक्षण में कर्मचारियों की भारी अनुपस्थिति, ओपीडी सेवाओं का निर्धारितसमय पर संचालन न होना, लैब सुविधा व दवाइयों की कमी, सुरक्षा गार्ड की गैरमौजूदगी, तथा कर्मचारियों का गणवेश में न होना जैसी गंभीरलापरवाहियाँ सामने आईं।
10 से 11 कर्मचारी गायब — बीएमओ भी नहीं थे मौजूद
उपस्थिति पंजी की जांच में पाया गया कि 10 से 11 कर्मचारी बिना किसी सूचना के अनुपस्थित थे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. योगेन्द्र पैकरा भी मौजूद नहीं थे, जबकि वे स्वास्थ्य केन्द्र के संचालन केलिए जिम्मेदार अधिकारी हैं।
ओपीडी रजिस्टर भी सही तरीके से संधारित नहीं किया गया था, जिससे स्पष्ट हुआ कि केंद्र की कार्यप्रणाली में भारी अनियमितताएँ चल रही थीं।लापरवाही का खामियाज़ा मरीजों को उठाना पड़ रहा था, जिन्हें आपात स्थिति में अंबिकापुर या लखनपुर की ओर भागना पड़ता था।
पहले भी जारी हुआ था नोटिस — सुधार नहीं दिखा
संयुक्त संचालक डॉ. शुक्ला ने बताया कि बीएमओ को पहले भी नोटिस जारी किया गया था, लेकिन लापरवाही कम होने के बजाय लगातार बढ़तीरही।
स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा था और आमजन परेशान हो रहे थे।
बीएमओ हटाए गए, नई जिम्मेदारी सौंपी गई
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से बड़ी कार्रवाई करते हुए—
बीएमओ डॉ. योगेन्द्र पैकरा को उनके पद से हटा दिया गया।
डॉ. संजीव कुमार तिग्गा को प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी नियुक्त किया गया।
यह कदम स्वास्थ्य केन्द्र की व्यवस्था को दुरुस्त करने और सेवाओं को सुचारु रूप से चलाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
“लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी” — संयुक्त संचालक
डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य सेवा आम जनता के जीवन से जुड़ी है, और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा मिलने पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
संदेश साफ — जवाबदेही तय होगी, अव्यवस्था नहीं चलेगी
इस कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग में अनुशासन और जवाबदेही की दिशा में बड़ा संदेश गया है।
उदयपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की अव्यवस्था अब सुधार की राह पर है और मरीजों को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।