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बस परमिट में मनमानी के आरोप, जांच की उठी मांग

एक ही मार्ग पर बसों की संख्या और समय-सारिणी सार्वजनिक करने की मांग।

Admin 02 Nov 2026 1 बार देखा गया
बस परमिट में मनमानी के आरोप, जांच की उठी मांग

एमसीबी/मनेंद्रगढ़। मनेंद्रगढ़ से केल्हारी जा रही यात्री बस के सेमरमथानी मोड़ के पास पेड़ से टकराने की घटना ने एक बार फिर क्षेत्र की यात्री परिवहन व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। हादसे में दो लोगों की मौत और करीब 20 यात्रियों के घायल होने की सूचना सामने आई है। इनमें चार घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। हालांकि, मृतकों और घायलों की संख्या की अंतिम आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।

इस दर्दनाक हादसे के बाद अब सवाल सिर्फ चालक की लापरवाही या सड़क की खराब स्थिति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवहन विभाग की परमिट आवंटन व्यवस्था और बसों की समय-सारिणी पर भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, कुछ मार्गों पर महज दस-दस मिनट के अंतराल पर बस संचालन के लिए परमिट दिए जाने की बात सामने आ रही है। यदि यह जानकारी सही है, तो इसकी निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है।

सवाल यह है कि क्या एक ही मार्ग पर इतनी कम समय दूरी में बसों का संचालन यात्रियों को बेहतर सुविधा दे रहा है या फिर बस संचालकों के बीच प्रतिस्पर्धा की स्थिति पैदा कर रहा है? कहीं अधिक यात्रियों को बैठाने और निर्धारित समय पर पहुंचने की होड़ में सड़क सुरक्षा तो प्रभावित नहीं हो रही?

दस मिनट का अंतराल, यात्रियों को बैठाने की होड़!

बसों के संचालन में समय-सारिणी का सीधा संबंध यात्री सुविधा और सुरक्षा से होता है। यदि एक बस के कुछ ही मिनट बाद दूसरी बस उसी मार्ग पर रवाना होती है, तो यात्रियों को अपने वाहन में बैठाने की प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका रहती है।

ऐसी स्थिति में चालक पर समय से पहुंचने और अधिक यात्रियों को बैठाने का दबाव बन सकता है। इसके चलते तेज गति से वाहन चलाने, निर्धारित समय से पहले निकलने और आगे चल रही बस से आगे निकलने की कोशिश जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

हालांकि, सेमरमथानी मोड़ पर हुए हादसे का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन बसों के बीच समय-अंतराल और परमिट व्यवस्था से जुड़े सवालों की अनदेखी नहीं की जा सकती। परिवहन विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि किन नियमों और परिस्थितियों के आधार पर एक ही मार्ग पर इतनी कम समय दूरी वाली समय-सारिणी निर्धारित की जा रही है।

पहाड़ी और घाटी वाले रास्तों पर अलग व्यवस्था जरूरी

मनेंद्रगढ़-केल्हारी सहित एमसीबी क्षेत्र के कई मार्ग जंगल, पहाड़ी, घाटी और तीखे मोड़ों से होकर गुजरते हैं। ऐसे रास्तों पर बसों का संचालन मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक सावधानी और बेहतर समय प्रबंधन की मांग करता है।

सड़क की चौड़ाई, मोड़ों की स्थिति, दृश्यता, ढलान और मौसम जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बसों की समय-सारिणी तय की जानी चाहिए। यदि दो बसों के बीच पर्याप्त अंतराल नहीं होगा, तो एक ही मार्ग पर बसों के लगातार पहुंचने और ओवरटेक करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।

इसलिए जरूरी है कि परिवहन विभाग प्रत्येक मार्ग की भौगोलिक स्थिति, दूरी, यात्रा में लगने वाले वास्तविक समय और पहले से संचालित बसों की संख्या का आकलन करने के बाद ही नए परमिट और समय-सारिणी निर्धारित करे।

परमिट व्यवस्था में पारदर्शिता पर उठे सवाल

परिवहन विभाग की परमिट प्रक्रिया को लेकर आर्थिक लेन-देन और मनमाने तरीके से परमिट जारी किए जाने के आरोप भी चर्चा में हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और दस्तावेजी प्रमाण सामने आना अभी बाकी है।

ऐसे में विभाग को परमिट आवंटन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनानी चाहिए। यह सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि संबंधित मार्ग पर कितनी बसों को परमिट जारी किए गए हैं, उनके संचालन का समय क्या है और परमिट स्वीकृत करते समय यात्रियों की सुविधा तथा सुरक्षा को किस आधार पर प्राथमिकता दी गई।

यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या अनियमितता सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

30 से 45 मिनट का अंतराल रखने की मांग

क्षेत्र में यह मांग भी उठ रही है कि एक ही मार्ग पर संचालित यात्री बसों के बीच पर्याप्त समय-अंतराल रखा जाए। इसके लिए कम से कम 30 से 45 मिनट का अंतराल निर्धारित करने की व्यवहारिक संभावना पर विचार किया जाना चाहिए।

हालांकि, सभी मार्गों पर एक समान समय-अंतराल लागू करना उचित नहीं होगा। बसों की संख्या, मार्ग की लंबाई, सड़क की स्थिति, यात्रियों की संख्या और वास्तविक यात्रा समय के आधार पर अलग-अलग समय-सारिणी तैयार की जानी चाहिए।

परिवहन विभाग को बस संचालकों की व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा से अधिक यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाजनक परिवहन को प्राथमिकता देनी होगी।

हादसे के बाद बसों की फिटनेस और परमिट की जांच जरूरी

सेमरमथानी मोड़ पर हुई दुर्घटना की निष्पक्ष जांच के साथ संबंधित मार्ग पर संचालित सभी यात्री बसों के परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, चालक के लाइसेंस और तकनीकी स्थिति की जांच भी जरूरी है।

इसके अलावा बसों की गति पर निगरानी, ओवरलोडिंग पर रोक और चालकों द्वारा यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। परिवहन विभाग को यह भी देखना होगा कि निर्धारित समय-सारिणी का वास्तविक रूप से पालन हो रहा है या नहीं।

अब परिवहन विभाग की जवाबदेही तय होने का इंतजार

सेमरमथानी बस हादसे ने क्षेत्र की यात्री परिवहन व्यवस्था में सुधार की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है। दुर्घटना के कारणों की जांच अपनी जगह जरूरी है, लेकिन इसके साथ उन व्यवस्थागत खामियों की पड़ताल भी होनी चाहिए, जो भविष्य में ऐसे हादसों का जोखिम बढ़ा सकती हैं।

परिवहन विभाग को स्पष्ट करना होगा कि क्या परमिट जारी करते समय मार्ग की वास्तविक परिस्थितियों और बसों के बीच पर्याप्त समय-अंतराल का ध्यान रखा जा रहा है। यदि व्यवस्था में कोई कमी है तो उसमें तत्काल सुधार किया जाना चाहिए।

आखिरकार बसों को परमिट देने का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध कराना है। सड़कों पर बस संचालकों के बीच प्रतिस्पर्धा की कीमत यात्रियों को अपनी जान जोखिम में डालकर नहीं चुकानी चाहिए। अब देखना होगा कि सेमरमथानी हादसे के बाद परिवहन विभाग इन सवालों पर ठोस कदम उठाता है या मामला केवल जांच और औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।

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वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक, जनता का मत डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क।