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26 साल में कोरबा ने तय किया विकास का लंबा सफर

बिजली, कोयला और एल्युमिनियम उत्पादन से बनी देशभर में पहचान

Admin 03 Nov 2026 2 बार देखा गया
26 साल में कोरबा ने तय किया विकास का लंबा सफर

कोरबा। छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान और देश के ऊर्जा मानचित्र पर कोरबा का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है। ऊर्जाधानी के नाम से प्रसिद्ध कोरबा आज केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभा रहा है। यहां की विशाल कोयला खदानें और ताप विद्युत परियोजनाएं देश के कई राज्यों की बिजली जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही हैं। राज्य गठन के बाद से कोरबा में कोयला उत्खनन और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वर्ष 2000 में जहां जिले की स्थापित ताप विद्युत क्षमता लगभग 2000 से 2400 मेगावाट के बीच थी, वहीं वर्तमान में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की परियोजनाओं को मिलाकर यह क्षमता 6000 मेगावाट से अधिक बताई जा रही है।

कोयला उत्पादन में देशभर में कोरबा की मजबूत हिस्सेदारी

कोरबा की पहचान देश के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों में होती है। कोल इंडिया लिमिटेड के कुल उत्पादन में जिले की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत बताई जाती है। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की गेवरा, दीपका और कुसमुंडा जैसी विशाल खदानें देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

गेवरा मेगा प्रोजेक्ट एशिया की सबसे बड़ी ओपनकास्ट कोयला खदानों में शामिल है। इसकी स्वीकृत उत्पादन क्षमता 70 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक पहुंचाने की दिशा में विस्तार कार्य किया जा रहा है। वहीं दीपका और कुसमुंडा खदानें भी देश की प्रमुख कोयला उत्पादक खदानों में शामिल हैं।

कोरबा से निकलने वाला कोयला देश के विभिन्न ताप विद्युत संयंत्रों तक पहुंचता है, जिससे बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों को लगातार ऊर्जा मिलती है।

कई राज्यों की बिजली जरूरतों में कोरबा का योगदान

कोरबा में उत्पादित बिजली देश के ऊर्जा नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां के ताप विद्युत संयंत्रों से निकलने वाली बिजली केंद्रीय और क्षेत्रीय ग्रिड के माध्यम से विभिन्न राज्यों तक पहुंचती है। महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों की औद्योगिक एवं अन्य ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में कोरबा की परियोजनाओं का योगदान है।

छत्तीसगढ़ को बिजली उत्पादन के मामले में सरप्लस राज्य बनाने में भी कोरबा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यहां उपलब्ध कोयला, पानी और औद्योगिक आधार ने जिले को ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाया है।

NTPC से लेकर BALCO तक बड़े बिजली संयंत्र

कोरबा में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कई बड़ी ऊर्जा परियोजनाएं संचालित हैं। NTPC कोरबा सुपर थर्मल पावर स्टेशन की स्थापित क्षमता 2600 मेगावाट है। यह देश के प्रमुख ताप विद्युत संयंत्रों में गिना जाता है और यहां उत्पादित बिजली केंद्रीय ग्रिड को आपूर्ति की जाती है।

इसके अलावा छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के अंतर्गत संचालित डीएसपीएम और एचटीपीएस संयंत्र भी राज्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

वहीं भारत एल्युमिनियम कंपनी (BALCO) का कैप्टिव पावर प्लांट भी औद्योगिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता है। कंपनी का बिजली उत्पादन संयंत्र एल्युमिनियम उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

कोरबा में बिजली उत्पादन की बढ़ती क्षमता ने जिले को देश के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों में स्थापित कर दिया है।

1320 मेगावाट की नई परियोजना से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता

कोरबा में बिजली उत्पादन को नई ऊंचाई देने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी (CSPGCL) द्वारा 1320 मेगावाट (660 मेगावाट की दो इकाइयां) क्षमता वाला नया अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना के पूरा होने से राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में और वृद्धि होगी।

आधुनिक सुपरक्रिटिकल तकनीक के इस्तेमाल से अपेक्षाकृत बेहतर दक्षता के साथ बिजली उत्पादन किया जा सकेगा। इसे कोरबा के ऊर्जा क्षेत्र के भविष्य के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कोयला खदानों से सरकार को मिलता है हजारों करोड़ का राजस्व

कोरबा की गेवरा, दीपका और कुसमुंडा जैसी खदानें केंद्र और राज्य सरकार के राजस्व का भी बड़ा स्रोत हैं। इन खदानों से रॉयल्टी, जीएसटी और जिला खनिज न्यास (DMF) के माध्यम से बड़ी राशि प्राप्त होती है। इस फंड का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास कार्यों के लिए किया जाता है।

चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष योगेश जैन का कहना है कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन के बाद से कोरबा में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों का लगातार विस्तार हुआ है। उनके अनुसार, जिले में बड़े पैमाने पर कोयला उत्पादन होने से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

उद्योगों के विकास के साथ स्थानीय समस्याएं भी बरकरार

कोरबा की औद्योगिक प्रगति के बावजूद स्थानीय स्तर पर कई चुनौतियां आज भी मौजूद हैं। वरिष्ठ नागरिक एवं रेडक्रॉस समिति के अध्यक्ष राम सिंह अग्रवाल का कहना है कि राज्य गठन के समय कोरबा में पहले से ही कई बिजली संयंत्र संचालित थे। वर्ष 2014 के आसपास नए बिजली संयंत्र स्थापित करने के लिए कई समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुए थे, लेकिन उनमें से कई परियोजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं।

उनका मानना है कि कोरबा में कोयले और पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। ऐसे में यदि प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाएं समय पर पूरी होतीं, तो जिले में रोजगार और औद्योगिक विकास की संभावनाएं और बढ़ सकती थीं।

वहीं, एसईसीएल की खदानों से प्रभावित भू-विस्थापित परिवारों की पुनर्वास, उचित मुआवजा और रोजगार जैसी मांगें लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि औद्योगिक विकास के साथ प्रभावित परिवारों के अधिकारों और हितों का संरक्षण भी जरूरी है।

पर्यावरण संरक्षण और फ्लाई ऐश प्रबंधन बड़ी चुनौती

कोरबा ने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाई है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संबंधी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। बड़े पैमाने पर कोयला खनन और ताप विद्युत उत्पादन के कारण वायु प्रदूषण, फ्लाई ऐश का निपटान, राख प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन जैसे मुद्दे गंभीर चिंता का विषय हैं।

पर्यावरण कार्यकर्ता लक्ष्मी चौहान का कहना है कि राज्य गठन के बाद कोरबा में कोयला उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है। आज जिले से लगभग 120 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन होने का दावा किया जा रहा है। एल्युमिनियम उद्योग का भी लगातार विस्तार हुआ है, लेकिन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है।

फ्लाई ऐश का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण, खदान प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्वास और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कोरबा के सतत विकास के लिए बेहद जरूरी हैं।

ऊर्जा के साथ रोजगार और बेहतर जीवन की भी उम्मीद

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 26 वर्षों की यात्रा में कोरबा ने ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। कोयला खदानों से लेकर बड़े ताप विद्युत संयंत्रों तक जिले ने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

हालांकि, कोरबा की वास्तविक प्रगति तभी सार्थक होगी, जब बिजली और कोयला उत्पादन के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार, भू-विस्थापितों को न्याय, नागरिकों को बेहतर सुविधाएं और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में भी ठोस परिणाम सामने आएं।

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सम्पादक / Author
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वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक, जनता का मत डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क।