कानून बनाम सिस्टम: रामानुजगंज में राजस्व तंत्र पर बड़ा सवाल

रामानुजगंज में राजस्व तंत्र पर गंभीर सवाल, अपर कलेक्टर के आदेश के बावजूद हुआ ऑनलाइन नामांतरण

कानून के राज पर भारी राजस्व तंत्र! स्टे ऑर्डर के बावजूद विवादित जमीन का नामांतरण

राजस्व विभाग की बड़ी चूक या जानबूझकर अवहेलना? स्टे के बीच बदला गया जमीन का रिकॉर्ड

रामानुजगंज (छत्तीसगढ़)। देश में डिजिटल गवर्नेंस और कानून के राज की बातें भले ही जोर-शोर से की जा रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों की पोल खोल देती है। छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज से सामने आया एक मामला न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि यदि निचले स्तर पर जवाबदेही न हो, तो उच्च अधिकारियों के आदेश भी कागजों तक सीमित रह जाते हैं। यह मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब अपर कलेक्टर द्वारा जारी स्पष्ट स्थगन आदेश (Stay Order) के बावजूद एक राजस्व निरीक्षक (RI) ने विवादित भूमि का ऑनलाइन नामांतरण कर दिया। इस कथित अवैध कार्रवाई से पीड़ित परिवार के अन्य वैध हिस्सेदारों को बिना सूचना, बिना सुनवाई और बिना कानूनी प्रक्रिया के उनके अधिकारों से वंचित कर दिया गया।

क्या है पूरा विवाद?

रामानुजगंज निवासी श्री नवीन कुमार तिवारी ने इस मामले को लेकर प्रशासन के उच्च स्तर तक शिकायत दर्ज कराई है। उनके अनुसार, यह मामला पारिवारिक वसीयत से जुड़ी भूमि का है, जिस पर उनके एक भाई द्वारा नामांतरण के लिए आवेदन किया गया। नामांतरण को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, क्योंकि अन्य कानूनी हिस्सेदारों की सहमति नहीं ली गई, और वसीयत की वैधता पर आपत्ति थी।

SDM स्तर पर न्याय न मिलने के बाद अपील

श्री तिवारी के अनुसार, जब SDM स्तर पर अपेक्षित सुनवाई नहीं हुई, तो उन्होंने अपर कलेक्टर के न्यायालय में अपील दायर की।

अपर कलेक्टर का स्पष्ट आदेश

अपील पर सुनवाई के बाद अपर कलेक्टर ने नामांतरण प्रक्रिया पर स्पष्ट रूप से स्थगन आदेश जारी कर दिया। यह आदेश तब तक प्रभावी था, जब तक मामले का अंतिम निराकरण न हो जाए।

स्टे ऑर्डर की विधिवत सूचना

पीड़ित का दावा है कि स्टे ऑर्डर की प्रमाणित प्रति संबंधित राजस्व निरीक्षक (RI) और तहसीलदार कार्यालय दोनों को विधिवत रूप से जमा कराई गई थी।

फिर भी हुआ नामांतरण — सबसे गंभीर सवाल

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि स्टे ऑर्डर की जानकारी होने के बावजूद बिना किसी सूचना या सुनवाई के राजस्व निरीक्षक ने विवादित भूमि का ऑनलाइन नामांतरण पूर्ण कर दिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि यह कार्रवाई जानबूझकर, मनमानीपूर्ण और न्यायिक आदेश की खुली अवहेलना है।

कानूनी दृष्टि से कितना गंभीर है मामला?

कानून विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रकरण केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर कानूनी उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

  1. IPC की धारा 166(A)

यदि कोई लोक सेवक जानबूझकर कानून के तहत दिए गए आदेश की अवहेलना करता है और उससे किसी व्यक्ति को नुकसान होता है, तो यह आपराधिक कृत्य माना जाता है।

  1. अवमानना अधिनियम, 1971

अपर कलेक्टर प्रशासनिक मामलों में न्यायिक शक्तियाँ रखते हैं। उनके आदेश की जानबूझकर अवहेलना सिविल अवमानना के अंतर्गत आती है।

  1. प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन

नामांतरण प्रक्रिया में—

सभी हितधारकों को सूचना देना सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य होता है। इस मामले में Natural Justice के मूल सिद्धांतों की अनदेखी की गई।

पीड़ित की मांगें

श्री नवीन कुमार तिवारी ने प्रशासन से स्पष्ट रूप से मांग की है अवैध नामांतरण को तत्काल निरस्त किया जाए, दोषी राजस्व निरीक्षक के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई हो, और न्यायिक आदेश की अवमानना को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए।

प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह मामला केवल एक परिवार की संपत्ति का विवाद नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि यदि उच्च अधिकारी के आदेश भी निचले स्तर पर नजरअंदाज किए जा सकते हैं, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करे? रामानुजगंज की यह घटना प्रशासनिक जवाबदेही, कानून के सम्मान और डिजिटल सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब यह देखना अहम होगा कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में उदाहरणात्मक कार्रवाई करता है, या यह प्रकरण भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।